■ भंडारा: रासायनिक उर्वरक की कीमतें पहले से ही अधिक हैं, इसके बाद भी अब उर्वरक निर्माता कंपनियों ने 1 जनवरी, 2025 से मूल्य वृद्धि की घोषणा की है. ऐसे में किसानों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ सकता है. सरकार की ओर से उर्वरक निर्माताओं को शह देने की यह कार्रवाई किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसी है. इन दिनों धान, सोयाबीन, कपास, अरहर की कीमतें सरकार की गारंटी कीमत से नीचे गिर गईं. वारंटी के तहत सामान खरीदने की कोई व्यवस्था नहीं है. नतीजतन, किसानों को निजी व्यापारियों को उपज बेचनी पड़ती है. लेकिन, निजी व्यापारी कम कीमत देकर किसानों को लूट रहे हैं. किसान खेती के भरोसे घर का खर्च, बेटी की शादी का खर्च, बच्चों की पढ़ाई का खर्च पूरा नहीं कर पाते. इसी बीच फर्टिलाइजर कंपनियों ने भी फर्टिलाइजर की कीमतों में बढ़ोत्तरी का ऐलान किया है. इसके अनुसार डीएपी खाद 1350 से 1590 रुपये, ट्रिपल सुपर फास्फेट 1300 से 1350 रुपये, दस छब्बीस, छब्बीस खाद 1470 रुपये से 1725 रुपये, बारह, बत्तीस, सोलह खाद 1470 रुपये से 1725 रुपये हो जायेंगे. यह बढ़ोत्तरी किसानों के साथ अन्याय है. एक ओर जहां कृषि उत्पादों की कीमतें कम हो रही हैं, वहीं सरकार उर्वरकों की कीमतें बढ़ाकर किसानों का जीना मुश्किल बना रही है.