भंडारा: बंटवारे के दौरान विस्थापित होकर जिले में स्थायी हुए परिवारों को शासन ने जमीन तो मुहैया कराई है, लेकिन उन्हें इन जमीन के कानूनन दस्तावेज नहीं दिए है. ऐसे में भंडारा के अनेक परिवार वर्षों से जिस जमीन पर रहते है उसके मालिक नहीं बन पाए हैं. जबकि दस्तावेज तैयार करने से जुड़ा शासन आदेश भी है. नागपुर व मुर्तिजापुर जैसे शहरों में विस्थापितों को जमीन के दस्तावेज तैयार करके दिए हैं. इसके अनुसार ही भंडारा में बंटवारे दौरान विस्थापित हुए परिवारों को आखिव पत्रिका बनाकर देने की मांग पूज्य सिंधी पंचायत ने की है. मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 1967 के दौरान जिले के विस्थापितों को नीलामी कर जमीन दी गई. ऐसे अनेक परिवार वर्षों से उसी जमीन पर मकान बनाकर निवास कर रहे है. इन परिवारों द्वारा नियमित रूप से घर टैक्स, जल टैक्स भरा जाता है. लेकिन जमीन पर हक होकर भी दस्तावेजों के अभाव में वह मालिक नहीं बन पाते. जमीन से जुड़ा कोई व्यवहार नहीं कर पाते. शिक्षा, शादी, बीमारी अथवा अन्य कामों के लिए आर्थिक जरूर पड़ने पर किसी तरह का कर्ज नहीं ले पाते. परिणामवश इन परिवारों को अपने आधारभूत अधिकारों से वंचित रहना पड़ रहा है. आखिव पत्रिका बनाकर देने की मांग करते हुए पूज्य सिंधी पंचायत द्वारा न्याय की गुहार लगाई गई नागपुर, मुर्तिजापुर में महाराष्ट्र के शासन परिपत्रक क्रमांक 2015 प. क. 240/ज-1 दिनांक 14/6/2018 के अनुसार विस्थापित परिवारों की आखिव पत्रिका तैयार की गई. इसी तरह से भंडारा के विस्थापित परिवारों की आखिव पत्रिका तैयार करने की मांग पूज्य सिंधी पंचायत के अध्यक्ष जैकी रावलानी, कोषाध्यक्ष दिलीप भोजवानी, सचिव भरत बलवानी, गुरूमुखदास भोजवानी, देवानंद हुंदानी, नरेश खानवानी, विक्की जैसवानी, राजकुमार भोजवानी, बच्चुराम पंजवानी, प्रीतम राजाभोज ने की है.