बच्चों पर मानसिक दुष्प्रभाव का बना है जोखिम
भंडारा: नई तकनीक के वैसे तो कई फायदे हैं, किंतु इसके नुकसान भी हैं. इसका असर समाज पर पड़ता है. मोबाइल और इंटरनेट के इस्तेमाल में सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलते हैं. प्रौद्योगिकी के सीमित उपयोग से आत्म विकास हो सकता है. अधिक मात्रा में इसके दूरगामी परिणाम होते हैं. मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल अब शहरों के बराबर ही ग्रामीण इलाकों में भी होने लगा हैं. इस डेढ़ जीबी डेटा की वजह से पूरा गांव व्यस्त है. यही स्थिति तब भी थी जब टेलीविजन ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचा. अब मोबाइल इंटरनेट की तकनीक ने इस पर काबू पा लिया है. ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है कि मोबाइल फोन का उपयोग करते समय इंटरनेट की आवश्यकता होती है. यदि इंटरनेट नहीं है तो मोबाइल फोन बेकार है. इस पर प्रचुर मात्रा में जानकारी उपलब्ध है. अब आप पर निर्भर है कि इनमें से कौन सी जानकारी लेनी है. इसे ध्यान में रखते हुए सोशल मीडिया, विभिन्न प्रकार के ऐप्स, गेम्स को संभालना जरूरी हो गया है. बुजुर्गों के साथ छोटे, नाबालिग बच्चे सभी मोबाइल के दीवाने हो गए हैं. सूचना प्रौद्योगिकी में सूचना का एक विशाल नेटवर्क उपलब्ध है. इंटरनेट ने मूल रूप से दूर रहने वाले लोगों को बहुत करीब ला दिया है. हजारों किलोमीटर की दूरी कम हो गई. ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी केवल 40 पहुंच है. डेटा का उपभोग अब युवा महिलाएं भी बडे पैमाने पर करने लगी हैं. उनके लिए चैटिंग एक पसंदीदा विषय है. छात्र फोटो वीडियो सोशल पोस्ट करना, रील बनाना, चैट करना, पबजी जैसे गेम खेलना आदि पसंद करते हैं.
मोबाइल पर ऑनलाइन शापिंग का बढ़ा क्रेज
परिवार का मुखिया एक दिन में एक जीबी डेटा का भी उपयोग नहीं कर पाता है. गृहिणियां ऑनलाइन शॉपिंग के लिए मोबाइल डेटा का उपयोग करती है. साथ ही रसोई से जुड़े कुछ नुस्खे खोजती हैं. छात्र सबसे ज्यादा इंटरनेट डेटा का इस्तेमाल करते हैं. जहां भी वाईफाई उपलब्ध है. वहां मोबाइल कनेक्ट किया जाता है. बच्चों को इंटरनेट की लत है, नेत्र रोग बढ़ जाते हैं. उनका व्यवहार बदल जाता है. वे और अधिक आक्रामक हो जाते हैं. इससे अकेलापन बढ़ता चला जा रहा है. इसका असर मानसिक विकास पर पड़ता है. लगातार मोबाइल फोन पर रहने से वास्तविक बैठक में संचार टूट जाता है.