कार्यकर्ता चाहते हैं उनका ही बने पालकमंत्री
भंडारा: भंडारा जिले को अब नए पालकमंत्री का बेसब्री के साथ इंतजार करना पड रहा है. कौन नया पालकमंत्री होगा और किस दल का होगा. इस बात पर पूरे जिले में हर राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का दौर जारी है. भले ही अब जिले के लोगों ने मान लिया है कि जो भी नया पालकमंत्री होगा, वह केवल झंडा मंत्री बनकर ही रह जाएगा. वह केवल जिला नियोजन की सभा के अलावा 26 जनवरी, 1 मई और 15 अगस्त को तिरंगा फहराने के लिए ही आएगा. इसके बाद भी इस बात की उत्सुकता कार्यकर्ताओं के बीच है कि वह किस दल का होगा. यह बात इसलिए कि जिस दल का पालकमंत्री होगा, वह उस दल के कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देता आया है. उस दल के कार्यकर्ताओं के काम अधिक करता आया है. अब तक यही होता रहा है और आगे भी ऐसा ही होता रहेगा, यह कार्यकर्ता मानते है. क्योंकि पालकमंत्री को कार्यकर्ताओं को खूश करने के अलावा अपने दल को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी निभानी होती है. इसलिए अब यह कहा जाए तो हर्ज नहीं है कि कार्यकर्ता भी चाहते है कि उसके अपने दल का पालकमंत्री बनना चाहिए
पालकमंत्री के लिए भाजपा और शिवसेना के बीच ही चर्चा जारी है. एक ओर चंद्रशेखर बावनकुले और दूसरी ओर आशिष जायसवाल को भंडारा जिले का पालकमंत्री बनाए जाने की चर्चा जोर पकड़ चुकी है. बावनकुले पहले भी जिले के पालकमंत्री पद संभाल चुके है. इसलिए वे यहां की राजनीति से लेकर यहां की अपेक्षाओं से भलिभांति वाकीफ है. इसलिए उनके नाम को जिले के राजनीतिज्ञों की पहली पसंद कहा जा रहा है.
दूसरी ओर आशिष जायसवाल के नाम की भी चर्चा है. दोनों विदर्भ के है और प्रशासनिक दृष्टि से उनके लिए भंडारा पहुंच पाना आसान हो सकता है. लेकिन इन दोनों के नामों को लेकर दलीय राजनीति भी हावी होने लगी है. भाजपा कार्यकर्ता चाहते है कि बावनकुले पालकमंत्री बने. वही दूसरी ओर शिवसेना के कुछ कार्यकर्ता भी दिल से चाहते है कि बावनकुल और जायसवाल के बीच ही बात है तो जायवाल उनके लिए बेहतर हो सकते है. हालांकि इसमें विधायक नरेंद्र भोंडेकर और उनके समर्थकों की राय शामिल नहीं