दिल्ली : किसी दूसरे के नाम पर सिम कार्ड लेने वाले या फ्रॉड मैसेज भेजने वाले व्यक्तियों पर शिकंजा कसेगा अब ऐसे लोगों के नाम ब्लैकलिस्ट में रखे जाएंगे. इन लोगों को अब 6 महीने से 3 साल तक के लिए कोई कनेक्शन नहीं मिलेगा. साइबर अपराध पर रोक लगाने के लिए दूरसंचार विभाग ने ब्लैकलिस्ट बनाने की शुरुआत कर दी है. किसी दूसरे के नाम पर सिम कार्ड लेने वाले या फ्रॉड मैसेज भेजने वाले व्यक्तियों को साइबर सिक्योरिटी को खतरे में डालने वाला माना जाएगा. जानकारी के अनुसार दूरसंचार विभाग ने ब्लैकलिस्ट बनाने की शुरुआत कर दी है. नए साल से इसमें दूसरे के नाम पर सिम लेने वालों के नाम जोड़े जाएंगे. साइबर सिक्योरिटी रूल्स में सरकार ने ये प्रावधान रखा है. सिक्योरिटी रूल्स में रिपोजिटरी ऑफ पर्सन बनाने का प्रस्ताव है. सरकार पहले ऐसे व्यक्ति को नोटिस जारी करेगी. व्यक्ति को 7 दिन के अंदर इसका जवाब देना होगा. जनहित में सरकार बिना नोटिस दिए भी कार्रवाई कर सकती है. जिन लोगों के नाम इस ब्लैकलिस्ट में आएंगे, उनके मौजूदा सिम कार्ड ब्लॉक कर दिए जाएंगे और वो 6 महीने से लेकर 3 साल के समय तक कोई भी नया सिम कार्ड नहीं खरीद पाएंगे. नए टेलीकॉम एक्ट में साइबर सिक्योरिटी रूल्स को अधिसूचित किया जा चुका है. यह अधिसूचना इसी साल नवंबर में जारी। जारी हुई है. इसमें सरकार ने कई नए प्रावधान जोड़े हैं. अब सरकार इन्ही साइबर सिक्योरिटी रुल्स का इस्तेमाल करते हुए एक्शन लेने जा रही है. सरकार साइबर अपराधियों की नकेल कसने लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है. कुछ दिन पहले ही उपभोक्ताओं में फैलाने के लिए टेलीकॉम कंपनियों को साइबर क्राइम से बचाव के कदमों वाली कॉलर ट्यून चलाने के निर्देश जारी किए गए थे. यह अभियान 3 महीने तक जारी रहेगा. इसके अलावा सरकार ने संसद में बताया था कि उसने साइबर अपराधों को नियंत्रित करने के प्रयास में 15 नवंबर, 2024 तक 6.69 लाख सिम कार्ड और 132000 आईएमईआई नंबर को ब्लॉक किया है.