परभणी के हत्याकांड के निषेधार्थ व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने डॉ. बाबासाहब आंबेडकर के विषय में अपमानजनक वक्तव्य करने का निषेधार्थ
भंडारा : परभणी में डॉ. बाबासाहब आंबेडकर इनके स्मारक के सामने संविधान शिल्प की कुछ सीरफीरे ने तोडफोड की पश्चात आंबेडकर अनुयायी की ओर से आंदोलन किया गया। उस शहर का वातावरण तनावपूर्ण था यह आंबेडकरी कार्यकर्ताओं के स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी। कुछ समाजकंटकों ने उद्देश्यपूर्ति हेतु दंगे करवाए, दूसरे दिन पुलिस की ओर से कोबिग ऑपरेशन के नाम पर आंबेडकरी समाज के महिला, पुरुष व युवाओं के अक्षरशः क्षति पहुंचायी गई। पुलिस ने बाहर के लोगों को साथ लेकर अमानुष तौर पर आंबेडकरी कार्यकर्ताओं से मारपीट की। जिसमें अनेक कार्यकर्ता गंभीर जख्मी हुए। गिरफ्तार सत्र चलाकर निष्पाप कार्यकर्ताओं को जेल में भरा गया। परभणी के नालायक थानेदार ने बाहर के लोगों की सहायता से महिला व पुरुष इन पर अत्याचार करने का दृष्य मोबाईल में रिकार्ड हुए सोमनाथ नाम के कॉलेज के शिक्षा अर्जित करनेवाले कार्यकर्ता को भी गिरफ्तार कर थर्ड डिग्री का उयोग किया गया। उसकी शवविच्छेदन लोगों के दबाव से इन कैमरे में करनी पड़ी, जिसमें सोमनाथ के साथ जोरदार मारपीट हुई। जिसकी मारपीट के दौरान मौत हो गई। जब जब महायुती की सरकार आती है तब तब किसी न किसी वजह से जनता पर अमान्य अत्याचार, सत्याचार की घटना घटित होती है। जिसका मूल जातिवाद है। यह बारबार सामने आता है। इस घटना के निषेधार्थ शनिवार 21 दिसंबर को भंडारा बंद तथा निषेध मोर्चे का आयोजन किया गया। निषेध मोर्चे की शुरूआत हुतात्मा स्मारक शास्त्री चौक भंडारा से दोपहर 2 बजे करते हुए डॉ. बाबासाहब आंबेडकर स्मारक जिलाधिकारी चौक भंडारा में भव्य सभा में परिवर्तीत होकर मांगों का ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को प्रस्तुत किया जाएगा। जिसके लिए भंडारा जिले के सभी आंबेडकरी अनुयायी विभिन्न सामाजिक संघटना, पार्टी संघटना, कार्यकर्ता ने उक्त निषेध मोर्चा व बंद के आयोजन में सहभागी होकर बंद व निषेधार्थ मार्च को सफल बनाने का आव्हान अजय मेश्राम आसित बागडे, विनय बनसोड विनीत देशपांडे, अजित बनसोड सुगत शेंडे, सुरज डोंगरे, तथागत फुले सुरज भालाधरे, शरद खोब्रागडे रूपचंद रामटेके श्रीकांत बनसोड, प्रफुल शेंडे हंसराज वैद्य, सदानंद इलमे, गोपाल सेलोकर, भैय्याजी लांबट, चंद्रशेखर टेंभुर्णी डॉ बाळकृष्ण सारखे रोशन जांभुळकर, अजबराव चिचामे, अशोक उईके, अमृत बनसोड, ज्ञानचंद, जांभूळकर, राजेश मडामे दिलीप वानखेडे, संजीव भांबोरे विजय भोवते, शिवदास गजभिये ने लिखित पत्र द्वारा किया है।