चंद्रपुर, सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव, पालकों का अपने बच्चों की ओर ध्यान न देना व समय की कमी से बेटियां संकट में है. विविध अत्याचार व प्रताड़नाओं के साथ बाल विवाह सिर उठाने लगे है. ऐसे में शादियों से जुडे लोगों को सचेत करना, उनमें साहस लाकर भरोसा दिलाना और इसे रोकने के लिए उन्हें तैयार करने के उद्देश से गुरुवार को जिला महिला व बाल विकास विभाग ने शहर के पंडित व मौलवियों को नियम कानूनों का पाठ पढ़ाया. जिला महिला और बाल विकास कार्यालय ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और बाल विवाह जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया. इस मौके पर शादी में अहम भूमिका निभाने वाले मौलवी, पंडित, मंडप डेकोरेशन वाले,
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
कैटरिंग, कैमरामैन आदि मौजूद थे. कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए जिला महिला और बाल विकास अधिकारी मीनाक्षी भस्मे ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को सोशल मीडिया का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए. उन्हें सबसे पहले अपनी सुरक्षा करनी चाहिए. जरूरत
पालकों के श्रम को समझे पाल्य
बाल विवाह लड़कियों को आगे बढ़ने से रोकता है. इसलिए हर समाज की लड़कियों को पढ़ाई-लिखाई जरूर करवानी चाहिए. मैं भी अपनी बेटी को पढ़ा रहा हूँ. बच्चों को अपने माता-पिता की मेहनत का पता होना चाहिए.
मौलाना मजीद, सदर, जमीयत उलमा हिंद.
पड़ने पर सिस्टम की मदद लेनी चाहिए. कार्यक्रम का संचालन रानी खडसे ने किया और आभार प्रदर्शन अभिषेक मोहुर्ले ने किया. इस अवसर पर बाल कल्याण कमेटी के सदस्य वनिता घुमे, मनीषा नखाते, सहायक पुलिस निरिक्षक रानी भोंवड़े, नसीम शेख और अन्य गणमान्य
समाज ले जिम्मेदारी
अगर परिवार काबिल होगा और बच्चों में सही संस्कार होंगे, तो समाज में ऐसी चीजें नहीं होंगी. साथ ही, जो चीजें हो रही हैं, उनकी ज़िम्मेदारी भी समाज को लेनी चाहिए. माता-पिता को हर दिन अपने बच्चों को समय देना चाहिए.



