रांची : ओडिशा के राज्यपाल पद से इस्तीफा देने वाले झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास राज्य विधानसभा चुनाव के पहले ही भाजपा में वापस लौटना चाहते थे. तब उन्होंने दिल्ली जाकर अपनी इच्छा से दल के वरिष्ठ नेताओं को अवगत कराया था. तात्कालिक वजहों से उन्हें इसकी सहमति नहीं मिली. ऐसे में दल में वापसी का मामला उस वक्त टल गया था. राज्यपाल का पद छोड़कर वे अपनी परंपरागत जमशेदपुर पूर्वी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते थे. अंदरूनी विवाद की संभावना को देखते हुए उन्हें दूर रखा गया था. हालांकि, उनकी बहू को विधानसभा चुनाव में टिकट देकर भाजपा ने संकेत दिया था कि रघुवर दास की भी राजनीति में किसी भी वक्त वापसी हो सकती है. चुनाव में उनकी बहू ने जीत हासिल की. नई परिस्थितियों में उनकी पार्टी में वापसी के लिए दल की सदस्यता ग्रहण कराई जाएगी, राज्यपाल बनाए जाने के बाद उन्होंने संवैधानिक बाध्यता की वजह से दल की सदस्यता छोड़ दी थी. झारखंड भाजपा के नेताओं को उम्मीद है कि जल्द ही रघुवर दास को लेकर स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. रघुवर दास को लगभग 14 माह पूर्व तात्कालिक वजहों से राज्य की राजनीति से दूर जाना पड़ा था. ऐसा बाबूलाल मरांडी को फ्री हैंड देने के उद्देश्य से किया गया था. भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को उम्मीद थी कि बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में पार्टी राज्य की सत्ता में वापसी कर सकती है, लेकिन विधानसभा चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के कारण भाजपा की चुनौतियां बढ़ गई है.